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"मैं सकुशल पहुंच गया हूँ और टिफिन भी मैंने खा ली है".

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आसमान में देखते हुए मैं सोचता था,
मेरी कहानी मेरे स्तर की है
जबकि मेरी हरेक कविताओं में
उसका स्तर है।

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ट्रेन के अपर बर्थ पर लेटे
जब मैं आसमान को देखने की कोशिश करता
तब मुझे ट्रेन की छत दिखती थी,
मैं सोचता था,
ट्रेन की छत में एक खिड़की होनी चाहिए
जहाँ से तारों की दुनिया मे जाया जा सके।

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महानगर से मेरे शहर को जाने वाली ट्रेन में
मेरे शहर से बहुत लोग थे,
मैं उनमें ज्यादातर को नहीं जानता था
जबकि महानगर से मेरे शहर के बीच, ट्रेन
उनसबको जान लेने के लिए चलाई गई थी।

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बहुत तेज चलती ट्रेन से
मैं नीचे उतर जाना चाहता था
जबकि ट्रेन की स्पीड बहुत ज्यादा थी,
और ट्रेन में मेरी एक बड़ी बैग भी थी
जिसमें मेरी प्रेमिका का दिया हुआ टिफिन रखा हुआ था।

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सुबह जब ट्रेन मेरे शहर पहुँचेगी,
तब उतरकर मैं एक चिट्ठी ट्रेन में छोड़ जाऊंगा
शाम को लौटी ट्रेन को देख
महानगर में मेरी प्रेमिका उस चिट्ठी को पढ़ लेगी
कि "मैं सकुशल पहुंच गया हूँ और टिफिन भी मैंने खा ली है।"

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