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मोनालिसा

और देर सुबह जब मैं जगता पाता कि, अपने हिस्से का बिस्तर सही कर मेरे माथे तक कम्बल खीच वह बिस्तर पर नहीं है। मैं आंख मिजता हुआ बिस्तर पर उठ बैठता और कुछ देर इधर उधर देखने के बाद भी जब मेरी नजरें उसे नहीं ढूंढ़ पाती तो मैं आवाज लगाने लगता "मोना....वो मोना... ....कहाँ चली गयी?" और जब कमरों से गूंजती मेरी आवाजें उसकी कानों से टकराती, वह वहीं बाथरूम से कहती "आयी...बस एक मिनट..." उसकी आवाज मेरी कानों में किसी सरगम सी पड़ती, और सहसा ही मेरा ध्यान, कमरे की ओर चला जाता हफ़्तों से बिखड़ी किताबें, कपड़ें, और भी न जाने क्या क्या सब किसी न किसी जगह पर सजी होती भले ही उन्हें उनकी जगह पर नहीं रखा गया होता पर वे सब कहीं न कहीं ऐसे रखी होती  जैसे वहीँ उसकी उपयुक्त जगह थी मैं कहता उससे, जब बाथरूम से बालों में तौलिया लपेटे, वह बाहर आती "क्यों करती हो इतना, क्या जरूरी थी कमरा साफ करने की?" वह मुस्कुराती और बिना कुछ बोले ही छत की ओर चली जाती। मैं एकटक उसे जाते हुए देखता रह जाता। बहुत दिन बीत गए उसे...

【मैं माँ से पूछना चाहता था, उनके प्रेमी के बारे में】

मैंने अपनी एक उम्र में बहुत सी कविताएं लिखी है, और अक्सर ही उन कविताओं को मैं अपनी प्रेमिका को भेज दिया करता था क्योंकि वे उन्हीं के लिए लिखी गयी होती थी। जीवन के युवावस्था में वह मेरी जिंदगी में आयी और हमने खूब उड़कर प्रेम किया फिर पता नहीं क्यों, एक दिन वह चली गयी? उनके जाने के बाद भी मैं कविता लिखता ही रहा कभी उन्हें मनाने की कोशिश करता तो कभी उनके जाने की कारणों को कविता में तलाशता तो कभी उनसे लौट आने की गुहार भी लगाता पर वह फिर लौट कर कभी नहीं आयी मैं कविता लिखता रहा पर न जाने क्यों, धीरे-धीरे मेरा मन लिखने से उचटने लगा और मैंने लिखना छोड़ दिया। फिर एक लंबे अरसे तक मैंने कभी कोई कविता नहीं लिखा। वह दिसम्बर का कोई तारीख रहा होगा, जब यूँ ही भटकते हुए मैं कन्याकुमारी पहुंच गया था, और डूबती दिन के, अंतिम पहर में समुद्र किनारे टहल रहा था, समुद्री जल दूर से भागती हुई आती और मेरी पाँव को भींगो वापस चली जाती मैं समुद्र के इस शरारत को देख ही रहा था कि अचानक से मुझे मेरी माँ याद आ गयी। मेरी माँ ने कभी कोई समुद्र नहीं ...

उम्र भर की नींद.

मैं सो जाना चाहता हूं अपनी बची हुई उम्र भर के लिए ताउम्र के लिए। ऐसी नींद में जो कभी न खुले फिर सूरज के किसी किरण को देखने के लिए। मुझे वो नींद सौप दो माँ। जो मुक्ति हो इस अंधेरे के बाद कि उजाले से मुझे वो नींद दो मां। अपनी आँचल में सूला लो मुझे फिर कभी न जगने के लिए मुझे नींद दो माँ मुझे नींद दो ताउम्र के लिए।

चुड़ैल

रात का कोई तीसरा पहर रहा होगा।मुझे याद है पिछले तीन-चार सालों में मैं कभी इस पहर में नहीं जागी थी और अगर संयोग से जग भी गयी थी तो उठ कर बाहर नहीं आ गयी थी। तो उस रात मैं जग कर टॉयलेट की ओर बढ़ गयी थी।देर रात को जब भी सोने जाती थी तो देखती थी कि टॉयलेट की लाइट जल रही है।वहां कोई स्विच नहीं होता था कि लाइट को बंद किया जा सके।इसलिए टॉयलेट की लाइट पूरी रात जलती ही रहती। तो उस दिन भी टॉयलेट की लाइट जल रही थी पर रात का तीसरा पहर था न ! टॉयलेट की लाइट टॉयलेट की चौखट न लाँघ पाई थी।मैं जैसे ही चौखट के ठीक पहले तक पहुंची थी मेरा पैर एक सिर से टकराया था और पैर कुछ बालों में उलझ गए थे।मैं सीधा कमरे की ओर भागी थी पर लगा था कि वह सर मेरे साथ तक कुछ दूर तक खिंचा आ गया था। मैं कमरे में आ तो गयी थी पर मुझे नींद न आयी।लगा जैसे वहां कोई चुड़ैल थी।अगले दिन मुझे पीजी छोड़ देना था और यह पिछले तीन साल पहले ही तय कर लिया गया था।मैं सुबह सुबह चुपचाप चली आयी थी पर उस रात को वहां नहीं छोड़ पायी।वह भी साथ आ गयी।

एक उदास कविता

एक उदास कविता ----------------------- तो , ऐसा कभी नहीं होता था कि , तुम नहीं होती थी तुम्हारी उपस्थिति मेरी आदत थी और तुम्हारा सौंदर्य   मेरा अभिमान पर , अब तुम नहीं हो और यह मेरा सत्य है तुम्हारा सत्य तो कहीं और होना है इसलिए तुम चली गई हो सब कहते है   तुम जहाँ गयी हो लोग वहाँ से वापस नहीं आते पर यह कैसा जाना हुआ जब हम लौट कर ही ना आ पाएं इसलिए मैं इंतज़ार करूँगा कभी इस रास्ते पर तो कभी उस रास्ते पर तुम किस रास्ते गयी थी मुझे ये भी तो नहीं पता न ! ©ACP

यादें

                                                    यादें                                                   ***** तुम अपने जाने के बाद भी मेरी स्मृति में हमेशा जीवित रही हो मैं उनके साथ जीता-मरता रहा हूँ एक वक्त के बाद लगता रहा है कि तुम खुद ब खुद भूला दी जाओगी या कुछ ऐसा होगा कि जिंदगी की भागदौड़ में मैं तुम्हें भूल जाऊंगा पर अक्सरहां वो नही होता न जो होना चाहिए था जैसे कि निश्चित ही मुझे तुम्हें भुला देना चाहिए था क्योंकि तुम्हारी स्मृति बहुत सी ऐसी यादों को खंगाल आती है जिनमें मैं लौटना नहीं चाहता वहां सिर्फ और सिर्फ तन्हाई है तुमसे बिछोह के ढ़ेरो किस्से है तो मैं उधर नही लौटना चाहता पर उन्हीं यादों में चंद यादें तुम्हारे साथ बीते पलों की है और उन खूबसूरत पलों ने ही तो स्मृति को जीवित रखा है परंतु सालो बाद ...

कितना सवाल पूछता है!

सुना है, एक रात की किस्से सुनाती थी वह कहती थी,उदास था चाँद उस रात फिर कोई पूछता चाँद भी उदास होता है? तो ,वह कहती चाँद के पास भी तो उसका प्यार होता है फिर कोई पूछता तो क्या प्यार में कोई उदास होता है? तब वह कहती प्यार में तकरार भी तो होता है और फिर कोई पूछ बैठता पर इससे पहले ही वह बोल उठती उदास था चाँद उस रात फिर से कोई पूछ बैठता तो क्या चाँद का चांदनी से तकरार था? फिर वह कहती उदासी बेकारण भी तो हो सकती है फिर से कोई कहता अच्छा !! तो क्या चाँद इसलिए उदास था,क्योंकि उसके पास कोई कारण न था? वह मुस्कुराती और कहती पर फिर कोई पूछ बैठता हो सकता है चाँद इसलिए उदास था क्योंकि क्योंकि उस रात आसमान में कोई तारा भी न था? सब बोल लेते पर वह वहीं थी उसकी कहानी भी वहीं थी कि,एक रात उदास था चाँद सुना है,एक रात की किस्से सुनाती थी वह कहती थी, उदास था चाँद उस रात फिर से आगे कुछ कहती इससे पहले ही कोई कह उठता चाँद भी उदास होता है क्या? अक्सर कहा करती थी अपनी कहानी में वह कि एक रात थी और एक चाँद था और रात में फैली चाँद की उदासी थी कोई पूछता,चाँद भी उदा...

पगला कहीं का !!

पता  नहीं  कहाँ से  आया   था   और  जब  आया   ही   तो  पहले  क्यों   नहीं। तब मैं   चौथे   सेमेस्टर   में   थीं,जब  वह  मेरे   कॅालेज   में   आया था,आश्चर्य  ! आश्चर्य  मुझे  भी  हुआ   था आख़िर   चौथे   सेमेस्टर   में  कोई  कैसे   काॅलेज   में  दाख़िला ले  सकता   हैं।और  यही बात  मैंने   उससे  मौका  मिलते   ही  पूछ  डाला।खैर,उसने  जो भी  बताया,मुझे   कुछ  समझ  नहीं   आया , और  चूँकि   मैं   उसे   समझना   चाहती   थीं  सो  उसके  अन्य  बातों  को  समझने   में अब  मेरी दिलचस्पी  बढ़  गई थी।   हाँ, तो  वह  कहता   था  कि  उसने   काॅलेज   में  दाखिला  थोड़े   ही   लिया   हैं,वह   तो   CIC ...