कहां-कहां से मिटाओगी मुझे अपने फेसबुक के वॉल से हटा दोगी डायरी के पन्नों से उन एक एक शब्द को काट कर दूर फेक दोगी जो तुमने मेरे बारे में लिखा है, अपनी उन सारी फोटोज को भी जला डालोगी जिसे मैंने क्लिक किया है? पर उन स्पर्शों का क्या जो आज भी तुम्हारी जिस्म पर मेरी एहसास बनकर रेंगती होगी। Photo - #ACP क्या तुम उन तमाम रातों को भी मिटा पाओगी, जो तुमने मेरी आँखों में जागकर बिताए है? मुमकिन होगा तुम्हारे लिए, उन शब्दों को फिर से अपने किसी नए प्रेमी के लिए गढ़ना जिसे तुम मेरे लिए कभी गढ़ा करती थी? और आज भी तुम आईने के सामने खड़ी होकर जब माथे के उस छोटे से गड्ढे के बीच बिंदी टिकाती होगी तब भी क्या, इस एहसास को भुला पाती होगी कि, मैं ठीक तुम्हारे पीछे खड़ा हो तुम्हें निहार रहा हूँ? और क्या अब भी तुम चाँद को, वैसे ही देखती रहती हो घण्टो? याद है तुम्हें जब यूँ ही चाँद को रात भर देखती हुई तुम कहती थी मुझसे "मैं रात भर तुम्हें देखती रही" क्या तुमने उन रातों को भी भुला दिया है? मुमकिन है, तुम्हारे लिए आसान रहा हो यादों को भुला पाना, या आज भी...
चप्पा-चप्पा...मंजर-मंजर...